इन्दौर स्थापना दिवस समारोह में बताया गौरवशाली इतिहास, दीपावली की तरह रोशनी से जगमगाया जूनी इन्दौर बड़ा रावला, विभिन्न हस्तियों के सम्मान

इंदौर 3 मार्च।  शहर के 301 वे स्थापना दिवस पर जूनी इन्दौर स्थित बड़ा रावला में दो दिवसीय स्थापना दिवस महोत्सव की शुरूआत शुक्रवार शाम धूमधाम से हुई। जूनी इन्दौर स्थित बड़ा रावला विद्युत रोशनी से नहा उठा। हजारों लोगों के बीच उत्साह के साथ आतिशबाजी भी हुई। महोत्सव के तहत समाजसेवियों एवं हस्तियों को राव राजा रतन पुरस्कार से सम्मानित किया। इन्दौर स्थापना दिवस समारोह समिति प्रमुख राव श्रीकांत मंडलोई (जमींदार) ने बताया कि शुक्रवार शाम आयोजन पूर्व मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह, राष्ट्र कवि सत्यनारायण सत्तन, शिक्षाविद् केके पांडे एवं नरेंद्रसिंह बिड़वाल आदि थे। अतिथियों ने कहा कि 301 वर्ष पहले ही राव राजा नंदलाल मंडलोई ने इन्दौर को व्यापारिक राजधानी बनाया था। यही नहीं आर्थिक उन्नति और व्यापार में गति के लिए 3 मार्च 1716 को मुगल बादशाह से कर मुक्त व्यापार की सनद ली थी। मंडलोई परिवार ने ही इन्दौर के रानीपुरा, नंदलालपुरा, सियांगज, तारादेवी रोड़, दौलतगंज, खातीवाला टैंक, बिलावली, एमटीएच कंपाउण्ड, रेसीडेंसी कोठी आदि का विकास किया था।
दिग्विजय सिंग ने अपने उद्बोधन मैं कहा की आज राजनीती व्यवसायी हओ गई है। जिस तरह से इंदौर का राजनीती करण हुआ। उसमे जमीन की महत्वपूण भूमिका रही। इंदौर ऐतिहासिक शहर है उसके इतिहास को तोड़कर स्मार्ट सिटी का रूप दिया जा रहा है। इसके लिए लोगो को बेघर किया जा रहा है। बेघर हुये लोगो को जमीन से नहीं इंदौर तथा उसका इतिहास व् उसकी पहचान से प्रेम है। अच्छा होता स्मार्ट सिटी के नाम पर तोड़फोड़ के बजाए नए सिरे से इंदौर का विकास किया जता। 
एक और तो इंदौर के इतिहास को स्मार्ट सिटी के नाम पर तोडा जा रहा है और वहीँ दूसरी और राव  मंडलोई परिवार इंदौर के इतिहास को सहेजने मैं लगा है। मंडलोई परिवार आज बड़ा रावला मैं पिछले 300 वषो से इंदौर के इतिहास को सहेजे हुई है। राव नन्दलाल मंडलोई ने राज्य का मोह त्याग कर प्रजा के हित का ध्यान मनोभाव मैं रखकर कार्य किया जो आप इंदौर की पहचान बने हुए है।
अतिथियों ने कार्यक्रम में समाजसेवी व विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान पर अमरजीतसिंह सूदन, डॉ. ओम जोशी, संजय यादव एवं नीलेश सिंघल को राव राजा रतन पुरस्कार से नवाजा भी गया। आयोजन में उज्जैन की बालमुकुंद मंडली के 20 कलाकारों ने माच, गणेश वंदना और लोक नाट्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर सभी का मनमोह लिया। महोत्सव के तहत डॉ. रचना पुराणिक व अन्य ने स्वरांजलि के माध्यम से गीत-संगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन्दौर स्थापना दिवस महोत्सव के तहत मुख्य अतिथियों ने मालवा के मंडलोई नामक पुस्तिका का विमोचन भी किया। इस पुस्तक में इन्दौर के विकास, वैभव और व्यापार के लिए किए गए प्रयासों व घटनाों का सचित्र वर्णन हैं। दो दिवसीय स्थापना दिवस समारोह की पहली शाम जूनी इन्दौर स्थित बड़ा रावला परिसर में आतिशबाजी के घंटों नजारे देखने को मिले। बड़ा रावला परिसर में एक ओर जहां लाखों बल्बों से विद्युत सज्जा की गई वहीं फूलों, गुलदस्ता, झालर, कालीन, झूमर, प्राचीन बर्तनों, तलवारों, तीर कमानों, युद्धाभ्यास की सामाग्री की आंतरिक सज्जा भी की गई थी।
जमींदार परिवार सन 1600 से – इन्दौर के स्थापना दिवस के पहले भी मंडलोई (जमींदार परिवार) का मालवा में अहम योगदान रहा है। अकबर ने मालवा के 12 भागों में विभक्त किया था। मालवा खंड उज्जैन सरकार के अंतर्गत कम्पेल परगने में था। सन 1600 में कम्पेल परगने का शासन मंडलोई परिवार के पास था। इसके बाद राव राजा गणेशदासजी के पुत्र बलरामजी को एक हस्ती ने कम्पेल से 14 किलोमीटर दूर खान नदी के किनारे रहने का सुझाव दिया। बलरामजी ने 1650 में खान के किनारे रावला बनाया जो आगे चलकर बड़ा रावला के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद इन्दौर का विकास राव राजा नंदलालजी ने 1716 के आसपास योजनाबद्ध तरीके से किया।
इन्दौर स्थापना दिवस समारोह समिति प्रमुख राव श्रीकांत मंडलोई ने जानकारी देते हुए बताया कि  महोत्सव के तहत शनिवार 4 मार्च को इन्दौर के इतिहास, विकास और वैभव पर सभी का ध्यान दिलाती दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का शुभारंभ मध्यप्रदेश सांस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव करेंगे। प्रदर्शनी में राव राजा राव नंदलाल, सवाई राजा जयसिंह एवं बाजीराव पेशवा बल्लाल के पत्र इस प्रदर्शनी में रखे जाऐंगे। साथ ही प्रदर्शनी में पुराने जमाने में बग्घियां एवं हाथी की सवारी में प्रयुक्त होने वाले हौदे एवं अंबारी इस प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र रहेंगे। जो दर्शकों को 300 साल पूर्व की याद ताजा करेंगे।  यह प्रदर्शनी रविवार 5 एवं सोमवार 6 मार्च तक सभी शहरवासी दो दिन तक इस प्रदर्शनी का अवलोकन भी कर सकेंगे। जूनी इन्दौर स्थित बड़ा रावला पर लगने वाली इस प्रदर्शनी में इन्दौर के इतिहास को दर्शाती 300 साल पुरानी वस्तुओं को दर्शक निहार सकेंगे। इस प्रदर्शनी में राजा-महाराजाओं द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुएं और उनकी तस्वीरों को इस प्रदर्शनी में निहारा जा सकेगा। आयोजन को सफल बनाने में श्री संस्थान बड़ा रावला एवं इन्दौर स्थापना दिवस समारोह समिति जुटे हुए हैं।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी- इन्दौर स्थापना दिवस समारोह समिति द्वारा आयोजित दो दिवसीय स्थापना दिवस समारोह में कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया जा रहा है। कवि सम्मलेन शनिवार 4 मार्च को शाम  8 बजे से शुरू होगा। कवि सम्मेलन में रतलाम, तराना, इन्दौर, मुरैना, वारा, मुजफ्फर नगर, मुंबई, उदयपुर,देवास के ं ख्याति प्राप्त कवि अपनी कविताओं से दर्शकों को गुदगुदाऐंगे। शनिवार को आयोजित इस कवि सम्मेलन में हिंदी और उर्दू के फनकार इस जश्न में चार चांद लगायेंगे। कवि सम्मेलन में प्रो. अजहर हाशमी (रतलाम), सुलतान मामा (तराना), गजल और शायर के शहजादे जनाब राहत इंदौरी (इन्दौर), हास्य कवि तेजनारायण बैचेन (मुरैना), हास्य कवि सुरेंद्र यागवेंद्र (वारा), गीत गजल के फनकार अशोक साहित (मुजफ्फर नगर), गीत के महारथी चंदनराय (मुंबई), हास्य कवि धमचक मुलतानी (रतलाम), गीतकार डॉ. भुवन मोहिनी (उदयपुर), हास्य व्यंगकार शशिकांत यादव ( देवास), गीतकार कैलाश जैन (इन्दौर), हास्य गीत गजलकार चकोर चतुर्वेदी (इन्दौर) शामिल हो रहे हैं। कवि सम्मेलन में राष्ट्र कवि सत्यनारायण सत्तन मुख्य सूत्रधार होंगे।

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