कोविड -19 की सटीक मेडिकल जांच में मददगार -लाइफास (Lyfas) कोविड स्कोर एंड्रायड आधारित एप्लिकेशन

एक्युली लैब्स के लाइफास को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया है

क्लीनिकल ट्रायल और नियामक कार्यवाही सितंबर के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है

द स्पेशल न्यूज़// नयी दिल्ली ब्यूरो //लाइफास एक एंड्रायड आधारित एप्लिकेशन है। इसमें जब कोई 5 मिनट के लिए मोबाइल फोन के रियर फोन कैमरे पर तर्जनी उंगली रखता है, तो नाड़ी और रक्त की मात्रा में परिवर्तन होता है और 95 बायोमार्कर एल्गोरिदम और सिग्नल प्रोसेसिंग तकनीकों के साथ इसका विश्लेषण प्राप्त होता है। इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन के जरिये किया जाएगा और स्मार्टफोन सेंसर सिग्नल्स को कैप्चर करेंगे। बाद में सिग्नल्स को फोटोप्लेथ्समोग्राफी (पीपीजी), फोटो क्रोमैटोग्राफी (पीसीजी), धमनी फोटोप्लेथीस्मोग्राफी (एपीपीजी), मोबाइल स्पिरोमेट्री और पल्स वैरिएबिलिटी (पीआरवी) के सिद्धांत पर संसाधित किया जाता है। लाइफास इसके बाद कार्डियो-श्वसन, कार्डियो-संवहनी, हेमटोलॉजी, हेमोरोलॉजी, न्यूरोलॉजी आधारित पैरामीटर विश्लेषण के बारे में बताता है जिससे शरीर में पैथोफिज़ियोलॉजिकल परिवर्तनों की जांच करने में मदद मिलती है। शरीर के इन परिवर्तनों को आगे और विश्लेषित किया जाता है।यह प्रौद्योगिकी आबादी की स्क्रीनिंग, क्वारनटीन लोगों की निगरानी और सामुदायिक प्रसार को लेकर निगरानी पर फोकस है। इससे कोरोना के बिना लक्षणों वाले लोगों के बारे में पता लगाया जा सकता है। मेदांता मेडिसिटी अस्पताल के साथ किए गए एक अध्ययन में 92% की सटीकता, 90% की विशिष्टता और 92% की संवेदनशीलता के साथ स्पर्शोन्मुख व्यक्तियों का पता लगाने में यह कारगर साबित हुआ है।

अध्ययन की सफलता को देखते हुए मेदांता एथिक्स कमेटी ने इसे बड़ी आबादी का अध्ययन करने के लिए अनुमोदित किया है। इस अध्ययन को क्लीनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री-इंडिया (सीटीआरआई) के लिए पंजीकृत किया गया है और साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इसे स्वीकार किया है। आरोग्य सेतु को आपके स्मार्टफोन में इंस्टाल करने के बाद जैसे वह आपके कॉन्ट्रैक ट्रेसिंग का पता लगता है वैसे ही यह लाइफास आपके सटीक मेडिकल जांच में मददगार होगा।

कोविड-19 की समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने मार्च 2020 में तकनीकी को सहयोग देने का फैसला किया था। कई राउंड की स्क्रीनिंग के बाद एक्युली लैब्स को बड़े पैमाने पर जांच के लिए चुना गया था। एक्युली लैब्स के लाइफास को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने 30 लाख रुपये का अनुदान दिया है और इसे वर्चुअली आईआईटी मद्रास, हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर (एचटीआईसी), मेडटेक इनक्यूबेटर से समर्थन हासिल है।

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