भागवत केवल ग्रंथ नहीं, दर्शन और चिंतन भी

निपानिया स्थित इस्कॉन मंदिर पर शोभायात्रा के साथ भागवत ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ, 9 को नौका विहार

इंदौर, 2 अप्रैल। भागवत केवल ग्रंथ नहीं, एक दर्शन, चिंतन और विचारधारा भी है जो मनुष्य को अपने व्यवहारिक जीवन की चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा देती है। भागवत के 17 हजार श£ोक जीवन के सभी संशयों का समाधान खोजने में सक्षम हैं। यह इतना गहन विषय है कि इसमें हम जितने अधिक गहरे जाएंगे, उतने ही अधिक रत्न भी पाएंगे।
ये विचार हैं वृंदावन से आए भागवत प्रवक्ता बृजविलासदास के, जो उन्होंने आज निपान्या स्थित इस्कॉन के राधा गोविंद मंदिर पर अंतर्राष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) इंदौर द्वारा आयोजित सात दिवसीय भागवत ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ सत्र में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कथा के पूर्व मंदिर परिसर से शोभायात्रा भी निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरूष शामिल हुए। इस्कॉन के अन्य केंद्रों से आए संत-विद्वान भी यात्रा में हरे रामा हरे कृष्णा संकीर्तन करते हुए चल रहे थे। कथा शुभारंभ पर इस्कॉन इंदौर के अध्यक्ष स्वामी महामनदास, उत्सव संचालन समिति के अरविंद बागड़ी, श्रीमती कृष्णा सिंघानिया, संरक्षक पी.डी. अग्रवाल आदि ने विद्वान वक्ता का स्वागत किया। स्वामी महामन दास ने बताया कि भागवत कथा प्रतिदिन सांय 4 से 7 बजे तक होगी। संगीतमय भागवत कथा के दौरान विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएंगे। रविवार 9 अप्रैल को सांय 5 से 8 बजे तक मंदिर परिसर में राधा-गोविंदजी का पद्म नौकाविहार उत्सव भी वरिष्ठ समाजसेवी रमेशचंद्र अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में होगा। मंदिर परिसर में कथा श्रवण के लिए आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं।
स्वामी बृजविलासदास ने भी संकीर्तन के साथ कथा का शुभारंभ करते हुए भागवत की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि भागवत भारत भूमि की अनमोल धरोहर है। अनेक विद्वानों ने इसकी समीक्षा भी की है और अपने निष्कर्ष भी दिए हैं लेकिन अब तक कोई भी इस ग्रंथ की थाह नहीं ले पाया है। भागवत की यह विलक्षणता ही इसे दूसरे धर्मग्रंथों से अलग बनाती है। यही कारण है कि भागवत को बार-बार सुनने के बाद भी हमारे श्रोता कभी निराश नहीं होते। भागवत का प्रत्येक अंश सुनने वालों को उत्साही और आशावान बनाता है।

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