भाजपा में चालीस पार होंगे बाहर


दिल्ली की तर्ज पर होंगे नगर निगम के चुनाव, युवाओं को मिलेगा मौका
पत्नि, भाई, भतीज के लड़ाने की तिकड़म भी नहीं चलेगी

इंदौर। शहर के सभी 85 वार्डो की आरक्षण प्रक्रिया के बाद कई नेताओं के वार्ड हाथ से चले गए हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा इस बार दिल्ली की तर्ज पर इंदौर में भी नगर निगम चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है और शहर के सभी वार्डो में 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को मौका दिया जाएगा। इतना ही नहीं इसमें यह भी याल रखा जाएगा कि इनमें वर्तमान पार्षदों एवं निगम समिति के सदस्यों के परिजनों के नाम शामिल नहीं करेंगे। पूरी तरह से नए युवाओं को आगे लाया जाएगा।
नगर निगम के कल हुए वार्ड आरक्षण के बाद पार्षदी कर चुके एवं फिर से दावे के लिए तैयार कई नेताओं के वार्ड उनके हाथ से चले गए हैं लेकिन पार्षदी नहीं छोडऩे वाले नेताओं ने अपने परिजनों के नाम पर टिकट का दावा करने का मन भी बना लिया है तो कुछ ने आसपास के दूसरे वार्डो में संभावना तलाशना शुरू कर दी है। लेकिन भाजपा में युवाओं को आगे लाने वाली मुहिम के चलते अब वर्षो से नगर निगम में जमे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस संबंध में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने भी संकेत दिए थे कि पार्टी अब नए युवाओं को मौका देगी और हाल ही में शहर अध्यक्ष की नियुक्ति इसका ताजा उदाहरण है। कुल मिलाकर पार्टी की इस नीति से वर्षो से राजेन्द्र राठौर, चंदूराव शिंदे, मुन्नालाल यादव, मांगीलाल रेडवाल, अश्विन शुक्ल, गोपाल मालू, शंकर यादव, सुधीर देडग़े, विनिता धर्म, दिलीप शर्मा, अजयसिंह नरूका और सूरज केरो सहित कई नेताओं के नगर निगम से पत्ते कटेंगे।
भाई, भतीजा भी नहीं चलेगा
वार्डो से पार्षदी के लिए पूरी तैयारी करने के बाद महिला वार्ड होने पर नेताओं ने पत्नि को चुनाव लड़वाकर वार्ड पर कब्जा बरकरार रखा। युवाओं को मौका देूने के लिए अब भाजपा में पार्षद का टिकट देने में यह सावधानी भी रखी जाएगी कि पूर्व पार्षदों की पत्नि अथवा किसी अन्य परिजन को टिकट नहीं दिया जाएगा।
कोर्ट में चुनौती देंगे
वार्ड आरक्षण को लेकर भाजपा प्रवक्ता ने पहले ही कहा था कि बिना मतदाता सूची में सुधार के वार्ड आरक्षण किया गया तो वे इस मामले को लेकर कोर्ट तक जाएंगे। वहीं शहर में शामिल किए गए 29 गांवों से वार्डो में हुए विस्तार का मामला भी कोर्ट में जा चुका है।

बॉक्स–आरक्षण होते ही हो गई नई तैयारी
कल आरक्षण की प्रक्रिया के बाद से ही कुछ नेताओं के मुंह लटक गए तो कुछ ने अपने आसपास के वार्ड पर नजरें गड़ा दी है। पूर्व एमआईसी सदस्य दिलीप शर्मा का वार्ड हाथ से जाने के बाद उनसे जुड़े एक कार्यकर्ता का कहना था कि भैया तो पास वाले वार्ड से लड़ लेंगे उनकी तो वहां भी पूरी तैयारी है। यही स्थिति पूर्व सभापति अजयसिंह नरूका की भी है उनका वार्ड भी आरक्षण की चपेट में आने के बाद उनकी नजर भी दूसरे वार्ड पर है।
बॉक्स– इसी आरक्षण के आधार पर होंगे चुनाव

निर्वाचन की प्रक्रिया का समय 50 दिन का है और वार्ड आरक्षण के बाद 50 दिनों के भीतर चुनाव होना चाहिए, लेकिन इस बार विधानस ाा उपचुनाव के चलते नगर निगम के चुनाव पचास दिनों में करवाना संभव नहीं है। ऐसे में निगम के चुनाव आगे बढ़ सकते हैं और संभव है कि नगर निगम के चुनाव नवंबर अथवा दिसंबर तक बढ़ सकते हैं। चुनाव देरी से होने की स्थिति में भी इसी वार्ड आरक्षण के आधार पर ही निगम के चुनाव होंगे।

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