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भारत बांग्लादेश के साथ संबंधों को देता है बहुत महत्त्व

बांग्लादेश की प्रधान मंत्री से मुलाक़ात के दौरान लोक सभा अध्यक्ष ने कहा :

indore. लोक सभा अध्यक्षश्रीमती सुमित्रा महाजन, जो 136वें  अंतरसंसदीय संघ के सम्मेलन में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल का नेतृत्व कर रही हैं, ने आज ढाका में बांग्लादेश की प्रधान मंत्री, शेख हसीना वाजेद से मुलाक़ात की  । श्रीमती महाजन ने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्त्व देता है और मानता है कि एक सशक्त, स्थिर और समृद्ध बंगलादेश भारत के हित में है । उन्होंने यह भी कहा कि भारत दोनों देशों के लोगों के परस्पर लाभ के लिए और सम्पूर्ण क्षेत्र में सबकी खुशहाली के लिए मैत्री, विश्वास और आपसी समझ के आधार पर इस संबंध को मजबूत बनाने के लिए वचनबद्ध है । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत बांग्लादेश के आर्थिक विकास में भागीदार बनने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है । इसके अलावा भारत बांग्लादेश की आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति का पूरा समर्थन करता है तथा  उग्रवाद और आतंकवाद की ताकतों के विरुद्ध छेड़े गए युद्ध में बांग्लादेश के साथ खड़ा है । प्रधान मंत्री शेख हसीना वाजेद ने आशा व्यक्त की कि भारत के साथ बांग्लादेश के घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंधों पर आधारित  दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध आने वाले समय में भी मजबूत बने रहेंगे ।

इससे पहले आज लोक सभा अध्यक्ष ने 136वें अंतर संसदीय संघ सम्मेलन के मुख्य विषय “असमानताओं को दूर करना : सभी के लिए गरिमापूर्ण जीवन और कल्याण सुनिश्चित करना” पर हुई चर्चा में प्रतिनिधियों को संबोधित किया । इस अवसर पर श्रीमती महाजन ने इस बात पर जोर दिया कि अनेक मौजूदा असमानताएं विश्वव्यापी हैं और इनका समाधान भी सतत विश्वव्यापी प्रयासों से ही संभव है । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विश्व समुदाय असमानता को कुशल और प्रभावी ढंग से दूर कर सकता है ।

 

भारतीय दर्शन की  इस मूलभूत धारणा का उल्लेख करते हुए कि व्यक्ति का विकास समाज को लाभान्वित करने और पूरे विश्व को साथ लेकर चलने के लिए ही होना चाहिए, श्रीमती महाजन ने कहा कि मानव गरिमा केवल संवैधानिक उपायों से ही सुनिश्चित नहीं की जा सकती । इसे अपने मूलभूत संस्कारों – समाज की मूल्य प्रणाली में शामिल करना होगा । उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि परम्परागत  भारतीय दर्शन में आत्मा और परमात्मा के एक होने और सामूहिक चेतना अर्थात चेतना के आधार पर सभी व्यक्तियों के एक होने के महान विचार की संकल्पना की गई है । इस प्रकार, हमारे दर्शन में परिकल्पना की गई है कि परिवर्तन और विकास से व्यक्ति नर से नारायण बन सकता है ।

इस बात का उल्लेख करते हुए कि कमजोर वर्गों के लोगों के प्रति  भेदभाव को दूर करने के लिए समय समय पर अनेक कानून बनाए गए हैं, श्रीमती महाजन ने कहा कि भारत ने वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए अनेक संस्थाओं की स्थापना की है । श्रीमती महाजन ने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2030 के लिए निर्धारित  महत्वाकांक्षी सतत विकास लक्ष्यों के भारत द्वारा समर्थन किए जाने से गरीबी, असमानता और महिलाओं पर हिंसा जैसी मुख्य चुनौतियों का सामना करके समतावादी विकास के लिए प्रयासों में तेजी लाने और कमियों को दूर करने में बहुत मदद मिलेगी ।

हाल ही में इंदौर में हुई दक्षिण एशियाई देशों के अध्यक्षों के सम्मेलन का उल्लेख करते हुए, श्रीमती महाजन ने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के पीठासीन अधिकारियों ने  विभिन्न क्षेत्रों में अपने नागरिकों में असमानता के क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान के लिए मिलकर कार्य करने के लिए अपनी सहमति व्यक्त की थी     

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