” भारत विश्व का पहला देश जिसने शीत कार्ययोजना पर दस्तावेज तैयार किया है , शीतलता बनाये रखो और प्रगति करो”: डॉ. हर्षवर्धन

नयी दिल्ली ब्यूरो// सरकार, उद्योग, उद्योग संघ और सभी हितधारकों के बीच सक्रिय सहयोग पर बल देते हुये पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि विश्व ओजोन दिवस ओजोन परत के संरक्षण एवं पर्यावरण से संबंधित अहम विषयों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने और काम करने के लिये एक अवसर उपलब्ध कराता है।

डॉ. वर्धन ने कहा कि यह देश में ओडीएस का प्रयोग समाप्त करने की दिशा में एक अहम पड़ाव है। मंत्री महोदय ने कहा कि उनका मंत्रालय पहले ही कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के स्किल इंडिया मिशन – के तहत एक लाख फ्रिज और एयरकंडीशनर तकनीशियनों के कौशल विकास के लिये कदम उठा चुका है।

डॉ. हर्षवर्धन ने मॉंट्रियल प्रोटोकॉल के तहत ओजोन परत को क्षति पहुंचाने वाले तत्वों का प्रयोग समाप्त करने के लिये लगातार काम करने की जरूरत पर जोर दिया।

डॉ. हर्षवर्धन इंडिया कूलिंग एक्शन प्लॉन का मसौदा – ‘मॉंट्रियल प्रोटोकॉल – भारत की सफलता की कहानी’ जारी किया। इस अवसर पर मंत्रालय की ओजोन इकाई की एक परिष्कृत वेबसाइट और ओजोन को क्षति पहुंचाने वाले तत्वों के बारे में एक सूचना प्रबंधन प्रणाली (एमआईएस) को भी जारी किया गया।

डॉ. हर्षवर्धन ने एचसीएफसी-22 और ज्वलनशील शीतकारकों पर प्रशिक्षकों और तकनीशियनों के लिये घरेलू एयरकंडीशनर लगाने की सर्वोत्तम प्रक्रियाओं से संबंधित दो लघु पुस्तिकाओं को भी जारी किया।

डॉ. हर्षवर्धन ने इस अवसर पर विश्व ओजोन दिवस पर आयोजित एक चित्रकारी, पोस्टर और स्लोगन प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को पुरस्कृत भी किया। इसके अलावा स्थापत्य कला के पाठ्यक्रम में एचसीएफसी को प्रयोग क्रमिक ढंग से कम करने और ऊर्जा की कुशलता को बढ़ाने के लिये एक निर्देशिका भी जारी की गयी।

इस अवसर पर मंत्रालय सचिव श्री सी. के. मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योग और अन्य हितधारकों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किये हैं। उन्होंने कहा, “शीतलता के वैकल्पिक तरीके उपलब्ध हैं जिन पर गौर किया जाना चाहिये। और दूसरा विषय उत्पादन और रखरखाव के लिये प्रशिक्षित कर्मियों की सेना तैयार करने का है।”

 

भारत विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने शीतलता कार्ययोजना का दस्तावेज तैयार किया है।

मोटे तौर इसका लक्ष्य इस प्रकार है: (i) अगले 20 वर्षों के लिये सभी क्षेत्रों की शीतलता संबंधी आवश्यकताओं इसे जुड़ी मांग और ऊर्जा की आवश्यकता का आकलन, (ii) इसके लिये उपलब्ध तकनीकों की पहचान साथ ही अप्रत्यक्ष उपायों, वैकल्पिक तकनीकों और अलग प्रकार की तकनीकों की पहचान, (iii) सभी क्षेत्रों के लिये एक टिकाऊ शीतलता और गर्म राहत प्रदान करने के लिये उपायों की सलाह देना, (iv) तकनीशियनों के कौशल विकास पर ध्यान और (v) घरेलू वैकल्पिक तकनीकों के विकास के लिये शोध एवं विकास के पारिस्थितिकी तंत्र का विकास।

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