अनादिकाल से राष्ट्र निर्माण में संतो की भूमिका

रविवार को दत्त जयंती उत्सव में श्रीमती कल्पना झोकरकर का गायन

इंदौर।संत अर्थात वह जो राष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति के लिए , समाज के सभी अंगों के लिए समान रूप से सोचता है और इसीलिए हमारे देश मे अनादि काल से राष्ट्र निर्माण में संतो की भूमिका सदैव सशक्त रही है और रहेगी ।

उक्त विचार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा ताई महाजन ने पलसीकर कॉलोनी स्थित श्री दत्त माऊली सदगुरु अण्णा महाराज संस्थान में दत्त जयंती उत्सव के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए । आप राष्ट्र निर्माण में संतों की भूमिका विषय पर मुख्य वक्ता के रूप संबोधित कर रही थी । सुमित्रा ताई ने महाराष्ट्र के संतों की परंपरा के उदाहरण देते हुए स्थापित किया की उन्नत , संवेदनशील और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संतों की भूमिका के बगैर पूर्ण नहीं हो सकता । संत ज्ञानेश्वर ने ज्ञानेश्वरी की रचना की जो आज भी मार्गदर्शन देती है । शिवाजी के गुरु संत रामदास थे जिन्होंने शिवाजी को मुगलों के विरुद्ध संघर्ष के लिए प्रेरित किया और मार्गदर्शन दिया इसी कारण शिवाजी हिंदवी स्वराज्य की स्थापना कर सकें । भाजपा प्रवक्ता गोविंद मालू ने भी संबोधित किया और कहा कि भारत के संतों से ना केवल हम देशवासी बल्कि सारी दुनिया प्रेरणा और मार्गदर्शन लेती है । संत विवेकानंद और महात्मा बुद्ध इसके उदाहरण है ।डॉ माधवी पटेल ने अपने सम्बोधन में कहा कि संत राष्ट्र निर्माण में ठीक उसी तरह सहायक है जैसे एक मां अपने बच्चे को छोटे से बड़ा करती है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति नरेंद्र धाकड़ ने भी संबोधित किया । कार्यक्रम का संचालन वर्षा देशपांडे ने किया । रविवार को दत्त जयंती उत्सव में श्रीमती कल्पना झोकरकर का गायन शाम 6 बजे से होगा ।

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