नई शिक्षा नीति-अब लगेगी स्कूल-कॉलेजों की मनमानी फीस पर लगाम

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सरकारी और प्रायवेट स्कूलों में होंगे एक जैसे नियम
भोपाल ब्यूरो।
कोरोना काल में पालक स्कूलों की फीस लेने की मनमानी से परेशान है। 34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक 100 फीसदी बच्चों को स्कूली शिक्षा में नामांकन कराने का लक्ष्य है। यानी हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना या उन्हें शिक्षा से जोडऩा है। साथ ही राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण में सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे। देश में पहली बार सरकारी और प्रायवेट स्कूलों में एक समान नियम लागू होंगे। समान नियम होने से प्रायवेट स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी और फीस पर लगाम लगेगी।


नई शिक्षा नीति में मध्यान्ह भोजान के साथ अब नाश्ता भी मिलेगा। सरकार की सोच है कि पिछड़े व आर्थिक रूप से विपन्न छात्रों को पढ़ाई से जोड़े रखना जरूरी है। इससे स्कूलों में नाश्ता भी मिलेगा। फिलहाल मध्यान्ह भोजन ही दिया जाता है। अब शारीरिक जांच के आधार पर सभी बच्चों को हेल्थ कार्ड भी दिया जाएगा।

हर पांच वर्ष में करेंगे शिक्षा की गुणवत्ता
सुधारने के लिए स्कूली शिक्षा की प्रत्येक पांच साल में समीक्षा की जाएगी। 2022 के बाद संविदा टीचर नहीं रखे जाएंगे। शिक्षकों की भर्ती नियमित की जाएगी। कृषि और स्वास्थ की पढ़ाई के अलावा सामान्य विवि और प्रोफेशनल संस्थान में छोटे कोर्स पर जोर दिया जाएगा। जिन स्थानों पर पारंपरिक और व्यक्तिगत शिक्षा का साधन उपलब्ध नहीं होगा वहां, स्कूल और कॉलेज स्तर की शिक्षा को ईमाध्यमों द्वारा मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए नेशनल एजुकेशन तकनीकी फोरम
(एनईटीएफ) बनेगा।

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