33 साल तक सरसंघचालक रहे गुरुजी ने ही दिया संघ को यह स्वरूप

बंच ऑफ थॉट्स में है संघ की लिखित प्रस्तावना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूजनीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री “गुरुजी” का आज जन्म दिन है। उन्हें कोटि कोटि नमन। आज ही के दिन नागपुर के रामटेक में गुरुजी का जन्म हुआ था। 1927 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से एमएससी की। यूनिवर्सिटी में ही 1932 को संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार जी से मुलाकात हुई। रामकृष्ण मिशन के स्वामी अखंडानंद की सेवा में दो साल बिताए। मौजूदा संघ की रूपरेखा को गुरुजी जी ने 1966 में अपनी किताब बंच ऑफ थॉट्स में समेटा। गुरुजी साल 1940 से लेकर 1973 तक सरसंघचालक रहे, उन्होंने ने संघ को विश्व का सबसे बड़ा संगठन बनाया। इस दौरान संघ भी कई मुश्किलों से गुजरा, लेकिन गुरुजी चटान की तरह डटे रहे। गुरुजी ने अपना पूरा जीवन देश और हिन्दू समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। 5 जून 1973 को नागपुर में उनका निधन हुआ। बावजूद इसके एक सोच के रूप में वो आज भी हिन्दू समाज के जेहन में हैं।

गुरुजी से जुड़ी रोचक घटना का उल्लेख एक बार वरिष्ठ संघ प्रचारक विजय नड्डा से सुनने को मिला। एक बार किसी स्वयंसेवक ने उत्सुकता वश गुरु जी उनसे पूछा कि आप संघ का क्या भविष्य देखते हैं, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि मैं चाहता हूँ संघ जल्द खत्म हो। उनका जवाब सुनकर स्वयंसेवक काफी हैरान हुआ, बात को आगे बढ़ाते हुए गुरु जी ने कहा आपका इलाज डॉक्टर कब तक करता है, जब तक आप बीमार हैं, ऐसा तो नहीं आप ठीक होने के बाद भी डॉक्टर आपको दवाई देता रहेगा। ऐसा करने से कोई और बीमारी आपको जकड़ लेगी। यकीनन जब समाज और देशवासी अपने अधिकारों के प्रति, देश के प्रति, समाज के प्रति जागरूक होंगे, तो समाज को संघ की क्या जरूरत है,यह सब तब होगा, जब समाज ही संघ होगा, संघ ही समाज होगा।

इसी चर्चा में एक प्रसंग और जोड़ता हूं, तो बात और साफ हो जाएगी। साल 2010 में मोहन भागवत जी ने सरसंघचालक का कार्यभार संभाला, इस दौरान दिल्ली में विशाल कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें संबोधित करते हुए भागवत जी ने कहा था संघ को लेकर अब किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, संघ अब 100 साल का होने जा रहा है, अब यह इतना बड़ा पेड़ हो चुका है कि अब उसे पानी देने की जरूरत नहीं है। अब यह पेड़ फल देगा, अब फल खाने का समय है। उनकी बात उस समय मेरी समझ से परे लग रही थी, लेकिन आज के हालात देख कर महसूस होता है कि सच में अब वो समय आ गया है, जब समाज संघ बनता जा रहा है, फिर भी सोचता हूँ कि डॉक्टर को दूर क्यों करें। बीमारी तो किसी दूसरे रूप में आ सकती है। पेड़ के फल भी खराब हो जाते है, इसके लिए समाज का संघ होना जरूरी है।

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