जगन्नाथ मंदिर में नहीं दिया था प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को प्रवेश

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मंदिर में केवल भारत निवासी, सनातन धर्म, जैन, बौद्ध, सिख को ही मिलता है प्रवेश
पुरी ब्यूरो।
देश-दुनिया में प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर खुद अपनी संस्कृित को सहेज कर रखा है। इस मंदिर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी दर्शन और प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई थी, क्योंकि हिन्दू होने के बाद भी उन्होंने पारसी से शादी की थी। इससे वे हिन्दू नहीं रह गई थी। इंदिरा गांधी की शादी पारसी फिरोज जहांगीर गांधी से हुआ था। विवाह के बाद तकनीकी रूप से हिन्दू नहीं रही, इससे उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।

उड़ीसा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में किसी का भी रसूख नहीं चलता। हिन्दुओं की आस्था के केंद्र इस मंदिर में सदियों से केवल सनातन धर्म मानने वालों को ही प्रवेश दिया जाता है। विदेशी नागरिक होने पर भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता।

जगन्नाथ मंदिर में सिर्फ सनातन धर्म मानने वाले हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म के लोगों को ही प्रवेश दिया जाता है। पिछले कुछ महीनों पहले यहां के पुजारियों और सेवादारों ने बयान दिया था कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी को भी इस मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। क्योंकि वे पूर्ण हिन्दू नहीं है।
साल 2005 में थाईलैंड की रानी को भी मंदिर में प्रवेश नहीं दिया, क्योंकि वे बौद्ध धर्म की तो थी, लेकिन विदेशी थी। यहां विदेशियों को भी प्रवेश नहीं मिलता। वर्ष 2006 में स्विजरलैंड के एक नागरिक ने मंदिर में पौने दो करोड़ रुपए दान में दिए थे, लेकिन उस नागरिक को भी मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया।

मंदिर के पुजारियों और उड़ीसा सरकार की वेबसाइट बताती है कि जगन्नाथपुरी मंदिर पर 17 आक्रमण हो चुके हैं। औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। मंदिर की मूर्तियों को कई बार बंगाल की खाड़ी में चिल्का झील द्वीप में छुपाया गया। इन घटनाओं के कारण मंदिर में केवल हिन्दुओं को ही प्रवेश दिया जाता है।

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